प्रगति की मंजिलें

प्रगति की मंजिलें

क्षमता वृद्धि के अलावा, एन डी डी बी की नीचे दर्शाई गई परियोजनाएं नए प्रवाह स्थापित करने वाली रही है ।

  • 1969-70 : लिंच बोरियावी (मेहसाणा) में 100 मीट्रिक टन क्षमता का प्रथम पशु आहार संयंत्र
  • 1972-73 : तरल दूध की लंबी दूरी के परिवहन के लिए रेल दूध टैंकरों का निर्माण
  • 1973-74 : लुधियाना में प्रथम फीडर संतुलन डेरी, 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता साथ ही 5 मी. टन प्रति दिन की क्षमता का पाउडर संयंत्र शुरू किया गया
  • 1973-74 : थोक बिक्री प्रणाली के रुप में एनडीडीबी ने तरल दूध के विपणन के लिए एक अनोखी प्रक्रिया विकसित की, जिसे पेटेंट नियंत्रक के कार्यालय द्वारा पेटेंट दिया गया और आयात प्रतिस्थापन पुरस्कार हुआ।
  • 1974-75 : दिल्ली में 4.0 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता का पहला मदर डेरी संयंत्र कमीशन किया गया ।
  • 1977-78 : डेरी उपकरणों के लिए आईडीएमसी में प्रथम एसेम्बली शॉप शुरु की गई।
  • 1981-82 : गुलाब जामुन उत्पादन के लिए सुगम डेरी में यंत्रचालित लाइनें शुरू हुई।
  • 1983-84 : हैदराबाद में खुरपका और मुँहपका रोग टीका संयंत्र ।
  • 1994-95 : गांधीनगर में 10 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता का पूरी तरह से स्वचालित डेयरी संयंत्र।
  • 1996-97 : खेड़ा में 20 मी टन प्रतिदिन क्षमता का प्रथम चीज संयंत्र।
  • 1997-98 : एशिया  की पहली और एकमात्र  उच्च सुरक्षा पशु रोग प्रयोगशाला भोपाल  में स्थापित की गई । इसके साथ जैव सुरक्षा स्तर – IV रोकथाम प्रयोगशाला है जो दुनिया में दुनियामें दसवें स्थान तथा वर्तमान में एशिया में एकमात्र है।
  • 2002-03 : भुज में 300 बिस्तर वाला  बहुआयामी विशेषता वाला (मल्टी स्पेश्यालिटी) अस्पताल स्थापित किया। प्रधानमंत्री के अनुरोध पर देश की प्रथम भूकंप प्रतिरोधी संरचना तैयारकी गई जिसमे बेस आइसोलेशन प्रौध्योगिकी का उपयोग किया गया ।
  • 2004-05 : हैदराबाद में मानव टीका संयंत्र
  • 2011-12 : कटारवा (बनासकांठा) में  1000 मीट्रिक टन क्षमता वाला स्वचालित पशु आहार संयंत्र । यह भारत में अकेला सबसे बड़ा पशु आहार संयंत्र है।