दर्शन

 

दर्शन
 
हम मानते हैं कि...
  • सहकार उद्यम का श्रेष्ठ रूप है। यह जन साधारण को उन संसाधनों पर नियंत्रण देता है जिसका वे स्वयं प्रजातांत्रिक पद्धति से निर्माण करते हैं।
  • आत्मनिर्भरता तभी प्राप्त होती है जब सब लोग मिलजुल कर काम करते हैं। उनकी आर्थिक हिस्सेदारी होती है तथा दोनों स्वतंत्र होते हैं और वे स्वयं की संस्थाओं के निर्माणऔर प्रबंध के लिए उत्तरदायित्व स्वीकार करते हैं।
  • समाज का प्रगतिशील विकास तभी संभव है जब विकास  का संचालन उनके हाथों में हो जिन्हें विकास से लाभ होने वाला हो।
  • विशेषतः महिलाओं और वंचितों की सहकारी प्रबंधन और निर्णयों में सहभागिता होनी ही चाहिए।
  • गतिशील बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखने के लिए हमारे समक्ष सबसे अच्छा रास्ता है कि हम अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए तकनीकी नवीनता और बेहतरतरीकों की खोज में लगे रहें।
  • बदलती परिस्थितियों के अनुसार हमारी विधियां बदलती रहती हैं, पर हमारे उद्देश्य और मूल्य हमेशा स्थिर रहने चाहिएं।