भावी योजना

भावी योजना

ऑपरेशन फ्लड (1970-1996) ने भारत के डेरी क्षेत्र को एक जीवंत व्यावसायिक गतिविधि के रूप में परिवर्तित करने में एक मजबूत आधारशिला रखी। इस अभियान ने नई पहल को आरंभ करने के लिए मार्ग प्रशस्त किया और ऐसी नई परिस्थितियाँ उत्पन्न की जिससे भारत दूध उत्पादन के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्त्व करने में सफल हुआ। डेरी उद्योग के समक्ष नई चुनौती थी - ऑपरेशन फ्लड के अंतर्गत सृजित ताने-बाने का प्रयोग करते हुए और अधिक मजबूत बनने के लिए नए रास्तों की तलाश। जवाबी भावी योजना इसका उत्तर है। डेरी सहकारी आंदोलन को उसकी सर्वोच्च क्षमता तक पहुंचाने का प्रयास है यह योजना।

भावी योजना चार प्रमुख क्षेत्रों पर केन्द्रित थी। ये क्षेत्र हैं - सहकारी व्यवसाय का सुदृढ़ीकरण, उत्पादकन वृद्धि, गुणवत्ता आश्वासन और राष्ट्रीय सूचना नेटवर्क का निर्माण। राज्य दुग्ध उत्पादक महासंघों तथा दूध उत्पादक सहकारी संघों, शिल्पकारों तथा मुख्य लाभार्थियों ने महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की है। योजना का निर्माण करते समय किसानों को लाभ पहुंचाने को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने योजना प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है और भावी योजना के कार्यान्वयन के लिए तकनीकी सहायता एवं आवश्यकता के अनुसार वित्तीय सहायता दी।