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इंटरनेट आधारित डेरी भौगोलिक सूचना प्रणाली (आई-डीजीआईएस

1.      प्रस्‍तावना

भारत के सहकारी दूध संघ किसान संगठन हैं जो ग्रामीण डेरी‍ किसानों को मदद पहुंचाने के लिए बड़े भू-भागीय क्षेत्रों में विविध गतिविधियां आयोजित करते हैं । इन गतिविधियों की उचित निगरानी करने तथा योजना बनाने हेतु यह आवश्‍यक है कि डिजिटल मानचित्र पर गांवों की भली-भांति पहचान की जाए तथा संबंधित ग्राम स्‍तरीय आंकड़ों को भी एकीकृत करके उन्‍हें एक मंच पर साथ-साथ प्रस्‍तुत किया जाए । इस इंटरनेट आधारित जीआईएस तकनीक के विकास के कारण डेरी क्षेत्र के सभी हितधारकों द्वारा गांवों की विशेषताओं एवं भौगोलिक आंकड़ों की उपयोगी सूचनाओं को अधिक मात्रा में जोड़ कर तेजी से उसका प्रसार करना अब संभव है यह व्‍यवस्‍था इंटरनेट आधारित डेरी भौगोलिक सूचना प्रणाली (आई-डीजीआईएस) के विकास एवं कार्यान्‍वयन पर केंद्रित है, यह मजबूत दृश्‍य उपकरण है जो न केवल गांवों की पहचान को संभव बनाता है बल्कि उसे भारत के सभी प्रमुख दूध उत्‍पादक राज्‍यों में मानव जनगणना, पशुधन आबादी गणना तथा गांव की प्रयुक्‍त भूमि/भू-भाग से भी जोड़ता है । इसे राष्‍ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा आरम्भिक तौर पर राष्‍ट्रीय डेरी योजना-। के अंतिम कार्यान्‍वयन एजेंसियों को मदद पहुंचाने हेतु विकसित किया गया है, ये एजेंसियां अधिकतर दूध संघ हैं । आगे, विभिन्‍न हितधारकों जैसे पशुपालन, राज्‍य/केंद्र सरकार के विभाग, पशुधन विकास बोर्ड, गैर सरकारी संगठन इत्‍यादि के लिए डेरी क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों की योजना बनाने में इसे अभिसरण (कन्वर्जेंस) उपकरण के रूप में प्रयोग में लाया जा सकता है ।  

दूध उत्‍पादन विभिन्‍न पर्यावरणीय तथा सामाजिक-आर्थिक कारकों पर निर्भर करता है तथा समान जिले या उप-जनपद (तहसील) के विभिन्‍न भागों में दूध उत्‍पादन में पर्याप्त अंतर होता है । इस प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में डेरी विकास से संबंधित गतिविधियों को इस प्रकार से नियोजित करने की आवश्‍यकता है जिससे स्‍थानीय-जनसांख्यिकीय कारकों के साथ-साथ उस क्षेत्र की डेरी संभावना का पता लगाया जा सके । स्‍मार्टफोन/जीपीएस तकनीक से जुड़े जीआईएस एवं आरएस तकनीक के विकास होने से वेब जीआईएस उपकरण विकसित करने के लिए अनेक संभावनाओं का पता लगा है जो डेरी क्षेत्र की गांव आधारित गतिविधियों की निगरानी तथा योजना बनाने से संबंधित समस्‍याओं से निपट सकता है । भारतीय गांव कोड गणना के अनुसार गांवों की उचित पहचान करने में इन तकनीकों का लाभ उठाने तथा डेरी क्षेत्र से संबंधित गांव स्‍तरीय एकीकृत सूचना के शीघ्र प्रसार के लिए इंटरनेट भी उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से इंटरनेट आधारित डेरी भौगोलिक सूचना प्रणाली (आई-डीजीआईएस) की अवधारणा की गई है । 

2. इंटरनेट आधारित डेरी भौगोलिक सूचना प्रणाली (आई-डीजीआईएस) का ढांचा  

आई-डीजीआईएस ने एक मजबूत जीआईएस दृश्‍य उपकरण विकसित किया है जिसे एनडीडीबी द्वारा इंटरनेट प्‍लेटफार्म पर उपलब्‍ध कराया जाना प्रस्‍तावित है । यह प्राथमिक तौर पर एनडीपी-। के अंतर्गत ईआईए के लाभ के लिए है । आगे, एनडीडीबी राज्‍य/जिला स्‍तरीय सहकारी दूध संघों/राज्‍य सरकारों, महासंघों, पशुपालन एवं पशुधन विकास बोर्ड के विभाग के विभिन्‍न तकनीकी ग्रुपों में इसके प्रयोग को प्रस्‍तावित किया गया है ।

 ईआईए विशाल भौगोलिक क्षेत्रों में विविध गतिविधियां संचालित करती है जो कि विभिन्न ग्रामीण स्‍थलों पर फैली हुई है । एक डिजिटल मैप पर गांवों के स्‍थानिक कोनों को जानना, जहां पर डेरी विशेष की गतिविधि पहले से जारी है या प्रस्‍तावित है जैसे दूध प्राप्ति, आहार संतुलन चारा विकास, कृत्रिम गर्भाधान इत्‍यादि । इससे उपर्युक्‍त अनुसार विभिन्‍न हितधारकों के बीच अभिसरण योजना (कन्वर्जेंस प्लानिंग) बनाने में मदद मिलेगी ।

आई-डीजीआईएस का भी डिजाइन बनाया गया है ताकि ग्रामीण आबादी कोड के साथ इन गांवों की उचित पहचान करने में मदद मिल सके । ईआईए द्वारा शामिल किए गए मिल्‍क शेड क्षेत्रों में प्रस्‍तावित तथा सक्रिय गांव दर्शाने के लिए इंटरनेट पर आसानी से उपलब्‍ध प्‍लेटफार्म के रूप में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है । एनडीडीबी द्वारा आयोजित कार्यशाला में आई- डीजीआईएस प्‍लेटफार्म एवं जीपीएस तथा/या मोबाइल / स्‍मार्टफोन हैंडसेट (अपेक्षानुसार) के माध्‍यम से ईआईए द्वारा गांवों की पहचान करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई है । 

एनडीपी-। के अंतर्गत ईआईए की क्षेत्र स्‍तरीय गतिविधियों की निगरानी तथा योजना बनाने के लिए आई-डीजीआईएस का प्रयोग प्रस्‍तावित है क्‍योंकि मानव जनगणना, पशुधन आबादी एवं गांव की प्रयुक्‍त भूमि/शामिल भूमि को डिजिटल मैप में एक ही स्‍थान एकीकृत कर उपलब्ध कराया जाता है ।

आई-डीजीआईएस में विशेषता आंकड़ों एवं आरेखीय सूचना के एकीकरण के परिणामस्‍वरूप अधिक मात्रा में आंकड़ों को प्रयोगपरक सूचना में परिवर्तित करने की योग्यता प्राप्त होती है । आई-डीसीआईएस की उपयोगी सूचना से दृश्‍य प्रदर्शन उपकरणों के प्रयोग करके निर्णय लेने तथा स्‍थानीय विश्‍लेषण करने में मदद मिलती है । इस प्रकार साधारण कंप्‍यूटर डिस्‍प्‍ले करना तथा प्रिंट आउट निकालने के लिए इसको उपयोग में लाना संभव नहीं है ।

वेबसर्वर में 553 डिजिटल जिला मानचित्र (भारत जनगणना जिला हैंडबुक प्रकाशन की स्‍कैन प्रति) का एक कोश है जिसमें जनगणना 2011 के अनुसार देश के 640 जिलों में उपर्युक्‍त लेयर आउट मौजूद है । इसे एकल भू-डाटाबेस के रूप में निर्मित किया गया है । जनगणना 2011 के मानक कोड पैटर्न का प्रयोग जिलों, उप-जिलों (तहसील) तथा गांव की पहचान के लिए किया गया । भारतीय जनगणना की प्राथमिक जनगणना सार (पीसीआर) आंकड़ा हस्‍तपुस्तिका के सभी लेयरों पर स्‍कैनिंग एवं डिजिटलीकरण किया गया है जिसमें 5 लाख से अधिक गांव शामिल हैं तथा इन बहुभुज क्षेत्रों को जिले, तहसील तथा ब्‍लॉक के मानक कोड से जोड़ा गया है, यह एक प्रमुख कार्य था । इसके अतिरिक्त, मानव जनगणना तथा पशुधन आबादी गणना के ग्रामवार प्राप्‍त स्‍तरों (विशेष आंकड़ा) का निर्माण करने के लिए महत्‍वपूर्ण प्रयास किए गए जिन्‍हें एकीकृत कर समान प्‍लेटफार्म पर उपलब्‍ध कराए जाने की आवश्‍यकता है ।

माइक्रोसॉफ्ट एसक्‍यूएल सर्वर आरडीबीएमएस के साथ ईएसआरआई आर्कजीआईएस सर्वर 9.3 तकनीक को जोड़ा गया है जिसका प्रयोग आई-डीजीआईएस फ्रेमवर्क के डिजाइन तथा विकास में किया गया है । 

ArcGIS Server 9.3 System Architecture

 

3.  इंटरनेट आधारित डेरी भौगोलिक सूचना प्रणाली (आई-डीजीआईएस) की क्षमताएं 

  1. पसंदीदा क्षेत्र: प्रयोक्‍ता की रूचि के अनुसार – यह इंटरफेस राज्‍य-जिला-तहसील को चुनने की सुविधा उपलब्‍ध कराता है । चयनित थीम पर पसंदीदा क्षेत्र को दर्शाया जाता है । एओआई मुद्रित किए जाने की क्षमता से युक्त है ।
  2. मापन तथा क्षेत्र: प्रयोक्‍ता द्वारा लाइन डिस्टेंस (मीटर तथा किलोमीटर) तथा बहुभुज क्षेत्र (वर्गमीटर तथा वर्ग किलोमीटर) का मापन किया जा सकता है ।
  3. क्‍वेरी बिल्‍डर: प्रयोक्‍ता उपलब्‍ध थीम तथा समरूपी फील्‍ड पर आधारित क्‍वेरी कर सकता है। चयनित लक्षणों तथा चयनित रिकार्डों को रेखांकित किया जा सकता  है। 
  4. स्‍थान: यह डिग्री मिनट सेकंड (डीएमएस) या डिग्री डेसीमल (डीडी) प्रपत्र में जीपीएस/स्‍मार्टफोन उपकरणों से प्राप्‍त बिन्‍दु स्‍थानों की लम्‍बाई (X) तथा चौडाई (Y) की जानकारी प्राप्‍त करने के लिए इंटरफेस उपलब्‍ध कराता है तथा यदि यह उपलब्‍ध हो तो इसे सबमिट करने पर अपेक्षित स्‍थल बिन्‍दु की स्थिति प्राप्‍त होती है ।
  5. बफर: यह किसी निर्धारित दूरी आंतरिक/बाह्य/दोनों विकल्‍पों के लिए मल्‍टीपल रिंग या सेलेक्‍टेड या क्‍वेरी लक्षणों के रूप में बफर निर्मित करता है । निर्मित बफ़र को ग्राफ़िक्स के रूप में देखा जा सकता है ।
  6. एक्‍सपोर्ट कार्य: यह जेपीजी, जीआईएफ, एसवीजी, पीएनजी या पीडीएफ फार्मेट के लेआउट/दृश्‍य को एक्‍सपोर्ट करने में सक्षम है ।
  7. प्रिंटिंग मैप: इसमें लेआउट प्रचालनों जैसे पेपर साइज तथा प्रिंट मैप टाइटल

एक्‍पोर्टिंग ले आउट मुद्रण की क्षमता है ।

  1. तालिका प्रिंट करना: इसमें एमएस एक्‍सेल फार्मेट में अपेक्षित लेयर एट्रीब्‍यूट टेबल को एक्‍सपोर्ट करने की क्षमता है ।
  2. मानक बेसिक जीआईएस कार्य प्रणाली : इसमें बेसिक कार्यक्षमताओं की योग्यता है  जैसे – सर्च, एट्रीब्‍यूट या वैल्‍यू द्वारा प्राप्‍त करना, पैन, क्‍लीयर सेलेक्‍शन जूम इन – जूम आउट, बिन्‍दु/लाइन/बहुभुज/त्रिकोण द्वारा फीचर्स का चयन करना ।
  3. सुरक्षा: यूजर राइट (प्रयोक्‍ता अधिकार)/एक्‍सेस (प्रवेश) को प्रबंधित करने के लिए यह विशेष रूप से निर्मित प्रशासन माड्यूल है। 

4. आई-डीजीआईएस की उपयोगिता

आई-डीजीआईएस इस तरह का पहला प्रयास है जिसके अंतर्गत डेरी क्षेत्र के लिए इतने बड़े पैमाने पर गांव स्‍तरीय आंकड़ों का एकीकरण किया गया है । कई जीआईएस विश्‍लेषण, स्‍थानिक एवं गैर स्‍थानिक दोनों विश्‍लेषण इस एप्लिकेशन के माध्‍यम से किए जा सकते है । कुछ व्‍याख्‍यात्‍मक उदाहरण नीचे दिए गए हैं 

# एनडीपी-। के अंतर्गत महाराष्‍ट्र के कोल्‍हापुर दूध संघ ने इस गांव में एक चारा विकास कार्यक्रम ‘’रि-वेजीटेशन (पौधे उगाने) की शुरूआत की । हितधारक के रूप में इस विशेष गांव में डेरी विकास से संबंधित गतिविधियों को प्रोत्‍साहित करने के लिए जानकारी अपेक्षित है । आई-डीजीआईएस निम्‍नलिखित के अनुसार जानकारी उपलब्‍ध कराता है । 

गांव: गोगांव, तहसील: साहूवाड़ी, जिला: कोल्‍हापुर (महाराष्‍ट्र)

  

चित्र 2 : सेटेलाइट चित्र 

          

चित्र 3: भूमि उपयोग भूमि कवर चित्र

      परिवार:373        भैंस: 205      संकर नस्‍ल गाय: 117

      जनसंख्‍या: 1809 किसान: 616      कृषि श्रमिक    : 14

      ग्रामीण क्षेत्र: 764 (हैक्‍टेयर)    कृषि क्षेत्र: 715

      सिंचाई क्षेत्र : 23       कृषि योग बंजरभूमि: 11 

इसे ग्रामीण सीमाओं के साथ देखा जा सकता है (गांव के भीतरी क्षेत्र को पृथक करने के लिए महत्‍वपूर्ण है, इसमें संभावित चारा विकास के लिए कृषि योग्‍य बंजरभूमि उपलब्‍ध होती है), आई-डीजीआईएस ग्रामवार मानव जनसंख्‍या, पशुधन आबादी तथा भूमि उपयोग भूमि कवर से संबंधित संपूर्ण डाटासेट प्रदर्शित करने में सक्षम है । इन प्रश्‍नों के उत्‍तर आसानी से दिए जा सकते हैं ।

# इस सड़क के दोनों ओर 2-3 किलोमीटर के भीतर कौन से गांव आते हैं ? क्‍या वर्तमान दूध मार्ग को बढ़ाकर इनमें से कुछ डेरी संभावना वाले कुछ गांवों को हमारे कार्यक्रम का हिस्‍सा बना सकते हैं 

 

चित्र 4 : उदाहरण-।  

# कितने गांव 3 किलोमीटर की परिधि में आते हैं ? यदि इस गांव में बल्‍क मिल्‍क कूलर लगाए गए तो, क्‍या उन्‍हें कवर किया जा सकता है ? इन गांवों में मिश्रित प्रजनन योग्‍य गोजातीय पशुधन की क्‍या आबादी है 


चित्र: 5 उदाहरण – 2

# इस बल्किंग अर्थात गांव आधारित दूध प्राप्ति प्रणाली (वीबीएमपीएस) के अंतर्गत कितने गांवों को कवर किया जा चुका है: इस कवरेज क्षेत्र में विस्‍तार की क्‍या संभावना है 

 

 चित्र: 6 उदाहरण – 3

# कौन सा ऐसा गांव है जहां डेरी बुनियादी ढ़ांचा, से, ब‍ल्‍क मिल्‍क कूलर स्‍थापित है, जीपीएस गणना (XY लंबाई/चौडाई) द्वारा समन्‍वयन बिंदु ज्ञात है लेकिन रेवेन्‍यू (राजस्‍व) गांव का नाम ज्ञात नहीं है ? 

 

चित्र: 7 उदाहरण – 4 

5. निष्‍कर्ष

डेरी क्षेत्र के विकास के लिए इस इंटरनेट आधारित जीआईएस की पूरी संभावना का केवल तभी पता लगाया जा सकता है जब सभी हितधारक कामन स्‍टैंडर्ड कोड उदाहरण के लिए भारतीय गांव गोड गणना पर विभिन्‍न सूचनाएं सांझा करके गांव स्‍तर पर डाटा इंटीग्रेशन (आंकड़ा एकीकरण) की प्रक्रिया की शुरूआत करें । उदाहरण के लिए, विभिन्‍न स्‍थलों पर दूध संघों/महासंघों द्वारा डेरी बुनियादी ढ़ांचों अर्थात गांव/शहर स्‍तर पर बल्‍क मिल्‍क कूलरों, चिलिंग संयंत्रों, डेरी सहकारी समितियों की मैपिंग की जा सकती है; भारत सरकार द्वारा प्रायोजित त्‍वरित चारा विकास कार्यक्रम (एएफडीपी), मनरेगा के अंतर्गत सूखा सुधार गतिविधियां, राष्‍ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत चारा विकास गतिविधियां, वाटरशेड विकास इत्‍यादि को मैप करके सांझा किया जा सकता है ।

अब आईटी प्रौद्योगिकी एमआईएस, जीआईएस, आरएस एवं जीपीएस तकनीकों से इस प्रकार के एकीकृत व्‍यवस्‍था से तैयार की गई है जिसमें विकास संबंधी योजनाओं और तैयारियों की निगरानी के लिए हमें प्रयोक्‍ता सहायक प्‍लेटफार्म उपलब्‍ध कराया जा सके । इसे गांव स्‍तर पर सूचनाओं की अधिकता के रूप में देखा जा सकता है जिसे एक मैप पर दर्शाया और समझाया जा सकता है । 

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