इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड

 
इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड
 
कम्पनी विवरण
 
राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने 1982 में इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (आईआईएल) की स्थापना इस उद्देश्य से की थी कि किसानों को खुरपका मुँहपका बीमारी के टीके सस्ते दाम पर मिल सकें। खुरपका मुँहपका टीके की प्रौद्योगिकी मेसर्स वेलकम फाउन्डेशन यूनाइटेड किंगडम से प्राप्त की गई थी। आज हैदराबाद स्थित संयंत्र की क्षमता खुरपका मुँहपका टीके की 25 अरब त्रिसंयोजक डोज़ बनाने की है।
 
भारत में पशुचिकित्सा संबंधी जैविकों के बाजार में आईआईएल आज एक अग्रणी संस्था है और यह पशुचिकित्सा टीकों का दुनिया के सबसे बड़े संयंत्रों में से एक का संचालन करती है। सबसे अधिक बिकने वाले रक्षा एफएमडी टीके के साथ आईआईएल पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत में तीसरी सबसे बड़ी संस्था  है। पूरे देश में विपणन की गहरी पैठ और छोटे पशुधारक तक पहुंच के साथ, आईआईएल के कई उत्पादों का बाजार में शीर्ष स्थान है।
 
आईआईएल भारत में मानव टीकों के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्था है।  भारत में यह चौथे स्थान पर है और अपने प्रमुख उत्पाद अमयरब के साथ यह बाल चिकित्सा और रैबीज़ खंड पर इसका ध्यान केन्द्रित है। आईआईएल की अनूठी विपणन संकल्पना जैसे कि अभय क्लीनिक (एक स्थान पर टीका केन्द्र) और अभय शोपे (टीके के लिए कॉल सेवा) ने इसे खुदरा बाजार में सशक्त उपस्थिति दर्ज करने में मदद की है। आईआईएल भारत के विशाल सर्वव्यापी प्रतिरक्षा कार्यक्रम को टीकों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।
 
आईआईएल देश में न केवल पशुधन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उतपादों और सेवाओं को उपलब्ध कराने के एनडीडीबी के अधिदेश का अनुसरण करता है, बल्कि वह अपनी प्रौद्योगिकी क्षमताओं का लोगों को लाभ पहुँचाने के लिए भी उपयोग करता है। आईआईएल का दृढ़ विश्वास है कि उसके “स्वास्थ्य सेवा में सस्ती और सुगम जैव प्रौद्योगिकी ” मिशन का केवल आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के सुदृढ प्रौद्योगिकी आधार द्वारा ही सक्रिय रूप से अनुकरण किया जा सकता है।
 
हमारा मिशन
 
स्वास्थ्य सेवा में सस्ती और सुगम जैव प्रौद्योगिकी
 
हमारे मूल्य
  • हमारा विश्वास है कि वैश्विक बाजार में केवल प्रौद्योगिकी चलित और मूल्य आधारित स्पर्धात्मक संस्था ही सफल हो सकती है।
  • हम उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों को सस्ते दाम में उपलब्ध कराने में विश्वास रखते हैं।इसके लिए हम निरंतर तकनीकी नवीनता और सुधार लाते हैं जिससे हमारे ग्राहक संतुष्ट रहें।
  • हम अपने संगठन में सामूहिक कार्यशैली, नेटवर्किंग, सतत सीखने और विकास में विश्वास रखते हैं।
  • हम अपने लोगों की क्षमता, योग्यता और उत्कृष्टता की कद्र करते हैं।
  • हम हमारे सभी व्यवहारों में ईमानदारी, प्रामाणिकता और सत्यनिष्ठा की कद्र करते हैं
  • हम अपने व्यवहार में परस्पर विश्वास, पारदर्शिता, ग्रहणशीलता, व्यावसायिकता की कद्र करते हैं
मार्च 2012 में समाप्त वित्त वर्ष में आईआईएल की कुल बिक्री 3120 मिलियन रुपये दर्ज हुई है।
 
पशु स्वास्थ्य
 
आईआईएल विभिन्न प्रकार के पशु स्वास्थ्य टीकों और फार्मूलेशन्स का उत्पादन और विपणन करता है.। एफएमडी टीका-रक्षा की सफल शुरूआत के बाद, आईआईएल ने 1989 में टिश्यू कल्चर रेबीज टीका ‘रक्षारब’ आरंभ किया। पशु स्वास्थ्य बाजार में यह पहला भारतीय टिश्यू कल्चर टीका था। तदन्तर, आईआईएल ने अपने अनुसंधान और विकास प्रयासों से कई टीके विकसित किए और उन्हें सस्ती दरों पर भारतीय बाजार में उतारा।
 
आईआईएल गोजातीय, भेड़, श्वानीय क्षेत्र के लिए पशु चिकित्सीय जैवीकों का उत्पादन एवं विपणन करता है। आईआईएल एक समर्पित बिक्री चैनल द्वारा विभिन्न प्रकार के पशु चिकित्सीय फार्मूलेशन का विपणन करता है। आईआईएल ने देश में पशुधन की पोषण संबंधी जरूरतों के विस्तृत अनुसंधान के आधार पर विकसित किए गए पशु चिकित्सक पशुचिकित्सा संबंधी न्यूट्रास्यूटिकल्स की भी शुरूआत की है।
 
  
 
 
 
 
पशुधन उत्पादकता सेवाएं
 “पशुधन उत्पादकता सेवाएं” (पूर्व में इंडिया जेन) दुधारु पशुओं की उत्पादकता में सुधार, दूध की उत्पादन लागत में कमी लाने, और दीर्घकालिक स्तर पर उनकी आय को महत्तम करने हेतु किसानों को उनकी दहलीज पर पशु स्वास्थ्य एवं प्रजनन सेवाएं उपलब्ध कराता है। एलपीएस डिवीजन स्थानीय युवाओं को चुनकर उन्हे प्रशिक्षित करता है और मानक संचालन प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करते हुए कृत्रिम गर्भाधान सेवा उपलब्ध कराने के लिए उन्हे कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन के रूप में काम पर रखता है।
 
 
 
 
सर्विस डाटा को केप्चर करने और उसका विश्लेषण करने के लिए पशु पहचान सिस्टम, बिक्री के बाद की सेवा  21 दिन के पोस्ट साइकल फॉलो अप सहित,  गर्भावस्था निदान ,  पशु चिकित्सकों द्वारा जटिल प्रजनकों  आदि के लिए ब्याने के बाद एवं बांझपन संबंधित परामर्श सेवा  भी दी जाती है। एनडीडीबी द्वारा प्रबन्धित दो वीर्य केन्द्र, जो देश के दो श्रेष्ठ वीर्य केन्द्र हैं ,वहां से जर्मप्लाज्मा लिया जाता है।

एलपीएस डिवीजन सात राज्यों में स्थित 200 से अधिक रक्षा पशु चिकित्सा केन्द्रों को भी चलाता है। रक्षा पशुचिकित्सा केन्द्रों पर योग्य पशुचिकित्सक होते हैं जो डेरी किसानों को उनकी दहलीज पर उपचारात्मक एवं निवारक पशु स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराते हैं।

 
  
मानव स्वास्थ्य
आईआईएल ऊंटी में एक उत्पादन सेवा का संचालन करती है जहां मानव प्रयोग हेतु वेरो सेल कल्चर रेबीज टीके का उत्पादन किया जाता है । इस संयंत्र की स्थापना 1998 में भारत सरकार के विशिष्ट अनुरोध पर हुई थी जिसका उद्देश्य है पुराने तथा असुरिक्षित शीप ब्रेन टीके (जिसे नर्व टिश्यू वेक्सीन – NTV भी कहा जाता है) को हटाकर उसके स्थान पर आधुनिक टिस्यू कल्चर टीके का उत्पादन करना है।
 
 
प्योरीफाईड वीरो सेल रेबीज टीके (पी वी आर वी) बनाने वाली आईआईएल विश्व में दूसरी कंपनी है और यह इस उत्पाद को “अभयरब ब्रांड” के नाम से अपने “अभय क्लीनिक” नेटवर्क द्वारा सस्ते दाम पर मार्केट करती है।
 
अभयरब और अभय क्लीनिक की सफलता से उत्साहित होकर आईआईएल ने हैदराबाद में हेपेटाइटिस बी, मीज़ल्स, टिटनेस टोक्सोइड एवं ट्रिपल प्रतिजन (डिप्थेरिया, परटुसिस और टिटनस) जैसे बाल चिकित्सा से जुड़े रोगों के टीके बनाने की एक नई सुविधा को आरंभ किया। इस नये टीका संयंत्र जिसने सितम्बर 2006 से चरणबद्ध रीति से कार्य आरम्भ कर दिया है वह भारत के रोगों के अनुरूप अन्य नये टीकों और संयोजन टीकों का उत्पादन करेगा।
 
आज आई आई एल विभिन्न राज्य सरकारों को रैबीज़ टीकों का मुख्य आपूर्तिकर्ता है और स्वास्थ्य मंत्रालय के सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम के लिए बाल चिकित्सा संबंधी टीकों का महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता है।
 
आई आई एल की अभय क्लीनिक की संकल्पना , जो फ्रेंचाइज़ी के आधार पर कार्य करती है और एक सुदृढ़ कोल्ड चेन द्वारा समर्थित है, योग्य चिकित्सकों द्वारा टीकाकरण सेवा उपलब्ध कराने की एक अनूठी संकल्पना है। आज आई आई एल अन्य अनोखी संकल्पनाओं जैसे अभय शोपे- जो डॉक्टरों को “वेक्सीन ऑन कॉल” पर समर्पित सेवा है और अभय मार्ट- कॉर्पोरेट अस्पतालों और संगठित खुदरा फार्मसी चेनों हेतु व्यवस्था द्वारा बाजार में खुदरा क्षेत्र की आवश्यकता को पूरा करती है।
 
 
 
 
  
 
 
 
 
पशु आहार
 
आई आई एल ने राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड की राष्ट्रीय डेरी योजना के अंतर्गत पशु आहार व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखा है । एन डी पी का उद्देश्य है देश में दूध की मांग और आपूर्ति की बढती खाई पाटने के लिए दुधारू पशुओं की उत्पादकता बढा कर 2020 तक देश में दूध का उत्पादन 18 करोड़ मी टन करने की योजना है।
 
पशु आहार दुधारू पशुओं की उत्पादकता पर असर डालने वाला सबसे महत्वपूर्ण घटक है।डेरी पशुओं को उनकी वृद्धि, गर्भावस्था,दुग्ध स्त्रवण जैसी शारीरिक अवस्थाओं के अनुसार संतुलित पोषक आहार देने का विचार डेरी किसान को अभी स्वीकार करना तथा आत्मसात करना बाकी है। इस पृष्ठ्भूमि को ध्यान में रखते हुए  आई आई एल ने वैज्ञानिक तरीके से बनाए गए आहार को सस्ते दाम पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पशु आहार व्यवसाय में आना उचित समझा।
 
गुजरात के राजकोट स्थित मदर डेरी के पशु आहार संयंत्र को हाथ में लेने के साथ आई आई एल ने अपने पशु आहार व्यवसाय को 1 अप्रैल 2011 से शुरू किया।इस संयंत्र की स्थापित क्षमता 200 टन आहार प्रति दिन की है।यहां बाईपास प्रोटीन और खनिज मिश्रण के उत्पादन की सुविधा भी उपलब्ध है। बछड़ों , सांडों और उच्च उत्पादकता वाले पशुओं की पोषक तत्वों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसने विभिन्न प्रकार के आहार आरंभ किए हैं।
 
निर्यात
 
आईआईएल दुनिया भर के 35 से अधिक देशों में अपने उत्पाद निर्यात करता है, तथा मध्य पूर्व, एशिया प्रशांत क्षेत्र, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, रूस और सीआईएस देशों के ग्राहकों पर विशेष ध्यान केन्द्रित है।
 
आईआईएल दुनिया भर के 35 से अधिक देशों में अपने उत्पाद निर्यात करता है, तथा मध्य पूर्व, एशिया प्रशांत क्षेत्र, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, रूस और सीआईएस देशों के ग्राहकों पर विशेष ध्यान केन्द्रित है।
आईआईएल अपने व्यापार को दक्षिण अमरीकी बाजार, अमरीका और यूरोप में बढ़ाने के लिए कार्य कर रहा है।
 
 
 
 
 
 
ग्राहक विवरण
 
आईआईएल का एक बहुत ही व्यापक ग्राहक प्रोफाइल है जिसमें निजी पशु चिकित्सक, राज्य एवं केन्द्र सरकार औषधालय, अस्पताल, सैन्य फार्म, शिक्षण संस्थान एवं विश्व विद्यालय, सहकारी दुग्ध संघ और महासंघ , राष्ट्रीय कार्यक्रमों और गैर सरकारी संगठनों का वित्तपोषण करने वाली विदेशी एजेंसियां हैं ।
 
मानव स्वास्थ्य के क्षेत्र में आईआईएल निजी मेडिकल चिकित्सकों, स्वास्थ्य मंत्रालय, तहत राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम, राज्य/केन्द्र सरकार संस्थानों, औषधालयों, कार्पोरेट अस्पतालों और एनजीओ को सेवाएं प्रदान करता है।
 
अनुसंधान एवं विकास तथा उत्पाद पाइपलाइन
 
इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लि. के अनुसंधान एवं विकास के प्रयास संक्रामक रोगों को नियंत्रण में लाने के लिए किफायती उत्पाद विकसित करने पर केन्द्रित हैं। अनुसंधान एवं विकास में पशु रोगों के लिए अनोखे टीके मुख्य केन्द्र में हैं। पशु स्वास्थ्य में आईआईएल एफएमडी के लिए एक वीएलपी (वाइरस लाइक पार्टिकल) टीके पर कार्य कर रही है और आईबीआर के खिलाफ निष्क्रिय टीके जैसे, एक रीकोम्बीनेंट टिक  टीके पर भी कार्य कर रही है। क्षय रोग, पैरा क्षय रोग तथा ब्रूसेलोसिस के प्रति नैदानिक तरीकों का विकास करना अनुसंधान तथा विकास के मुख्य कार्यक्षेत्र के रूप में जारी है।
 
मानव टीकों के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास ग्रुप ने पंचसंयोजक टीका (डीपीटी +  हेपेटाइटिस बी + एचआईबी), चिकन गुनिया टीका तथा जापानी एनसीफेलिटिस के लिए तकनीक विकसित की है जो अभी नैदानिक परीक्षण में है। संयोजन रूप में उपलब्ध इन टीकों से बच्चों और बड़ों में रोग का भार कम करने की संभावना है। इसके अलावा मानव पापीलोमा वायरस टीके तथा न्यूमोकोकल टीके विकसित करने के लिए कार्य चल रहा है।
 
अनुसंधान केन्द्र 1600 वर्ग मीटर क्षेत्र में बना है जहां बीएसएल स्तर 3 की सुरक्षा है और 60 वैज्ञानिक कई प्रौद्योगिकी प्लेटफार्म पर कार्य कर रहे हैं।
 
आईआईएल के अनुसंधान प्रयास जैविकों,नैदानिक  और टीकों की  नवीनतम प्रौद्योगिकी विकसित करने की दिशा में है।उष्ण कटिबंधीय रोगों, जो पश्चिमी देशों के लिए कम रुचिकर हैं परन्तु भारत जैसे देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, पर अनुसंधासन का ध्यान केन्द्रित है।
 
आईआईएल का कई प्रख्यात राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों जैसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस – भारत, नेशनल, इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलोजी – भारत, प्रोग्राम फोर एप्रोप्रोएट टेक्नोलोजी इन हेल्थ (पाध), अमरीका, सेन्टर फोर डीजीज कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन (सीडीसी), अमरीका, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच), अमरीका, इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ, यूके, हावर्ड मेडिकल स्कूल, अमरीका, सेन्टर फॉर डीजीज कंट्रोल (सीडीसी) ताइवान, इंस्टीट्यूट ऑफ मोलीक्युलर बायोलोजी एंड एप्लायड इकोलोजी-जमर्नी, सेन्टर हॉस्पीटलियर, यूनिवर्सिटायर वावेडाई, स्विजरलैंड तथा सबीन वैक्सीन इंस्टीट्यूट, अमरीका, जीएएलवी मेड मेरेडन रीसर्च इंस्टीट्यूट, आईबीआरआई आदि के साथ अनुसंधान समझोते हैं।
 
विनियामक मंजूरीः
 
आईआईएल सीजीएमपी, डबल्यूएचओ-जीएमपी मार्गनिर्देशों के अनुसार टीकों का उत्पादन करती है तथा आईआईएल के सभी उत्पादक यूनिट, भारत की नेशनल रेग्युलेटरी ऑथोरिटी के सीजीएमपी तथा डबल्यूएचओ-जीएमसी की सर्टिफिकेशन योजना के अनुसार प्रमाणित हैं। 
 
आईआईएल ने अपने संयंत्रों के लिए आईएसओ 9001 (गुणवत्ता प्रणाली), आईएसओ 27000 (आईटी सुरक्षा) तथा आईएसओ 14001 (पर्यावरण) सर्टिफिकेशन प्राप्त किए हैं।
 
विनिर्मित उत्पादः
 
पशु स्वास्थ्य क्षेत्र में आईआईएल गोजातीय एवं भेड़ पशुओं के लिए खुरपका- मुँहपका रोग, रेबीज, शीप पॉम्स, ब्रूसोलोसिस, हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया, ब्लेक क्वार्टर, पीपीआर, एन्थ्रेक्स, एन्टेरोटोक्सेमीया और थीलीरोसिस के टीका का उतपादन करती है।  
 
श्वानों के लिए आईआईएल हेपेटाइटिस, डिस्पेम्पर, लेप्टोस्पायरोसिस, पेरा इन्फ्लूएन्जा, ऐडानो वायरस, पारवो वायरस, केरोना वायरस तथा रेबीज के टीकों का उत्पादन करती है।
 
आईआईएल पशु स्वास्थ्य फार्म्युलेशन जिसमें एंटी बायोटिक शामिल हैं (एमोक्सीलीन, क्लोक्सीलीन, सेफ्ट्रीयोक्सोन, सेफ्टीयोफर इंजेक्शन), एनथेलमिनिटिक्स (फेनबनडाजोल एलबेन्डाजोल, राफेक्सानाइड, क्लोसेन्टेल) एनएसएआईडी (नीमुसलइड), एन्टी पैरासाइटिसाइड (सायपरमेथ्रीन), एनेस्थेटिक्स/जायलाजीन), विटामिन, खनिज तथा केल्शियम सप्लिमेंट का विपणन करती हैं।
 
2008 में आईआईएल ने पशु पोषण उत्पादन शुरू किए जो भारतीय बाजार के अनुरूप हैं और उपयोग में आसान हैं। इनमें शामिल हैं केल्शियम आहार गोलियां, क्षेत्र विशेष खनिज मिश्रण, बायपास प्रोटीन, बायपास फैट, यीस्ट बोलस, प्रजनन क्षमता सुधारने वाला चिलेटेड खनिज बोलस आदि ।
 
मानव टीका क्षेत्र में आईआईएल टेटेनस टोक्सोइड, डीपथीरिया, परट्यूसिस, खसरा, गल गण्ड रोग, रबौला, रेबीज तथा हेपेटाइटिस-बी के टीके तथा एकल तथा बहु डोज़, एकल तथा संयोजक रूप में उत्पादित करती है। इस नोट के अंत में एक विस्तृत उत्पाद सूची संलग्न है।
 
उत्पादन क्षमताएं-
 
आईआईएल की पशु टीका उत्पादन क्षमता 40 करोड़ डोज़ों से अधिक है और एफएमडी उत्पादन क्षमता 25 करोड़ त्रिसंयोजक डोज़ों से अधिक है।
 
आईआईएल भारत में मानव स्वास्थ्य टीके के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है जिसकी वार्षिक क्षमता 30 करोड़ डोजों की है जिसमें रैबीज, टीका, मानव (सेल कल्चर) के 70 लाख डोज़ों की क्षमता शामिल है।
 
भविष्य की योजनाएं-
 
कंपनी ने बायोटेक पार्क-चरण III कारकीपटल के निकट 50 एकड़ जमीन ली हैं जहां पशु टीके (ब्रूसेला आरबी 51 तथा अन्य जीवाणु टीके), पशु स्वास्थ्य फार्मुलेशन्स तथा मानव रैबीज टीके के लिए नई उत्पादन सुविधा बनाई जाएगी। रु. 1600 मिलियन के खर्च पर बनी इन सुविधाओं से व्यापारिक उत्पादन 2012 के मध्य तक शुरू हो जायेगा।
 
भारत में पशु टीकों की बढ़ती हुई आवश्यकताओं के लिए कंपनी की पुडुचेरी में नई पशु टीका उत्पादन सुविधा स्थापित करने की योजना है।
 
जरुरतमंदों तक पहुंचनाः-
 
आईआईएल ने कई प्रगति की मंजिलें तय की हैं। यह  एक टीका उत्पादक से शुरूआत कर एक बड़े जैविक उत्पादक के रूप में पहचान बना चुकी है।जो विकासशील विश्व के लोगों के फायदे के लिए जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग करती है।
 
आईआईएल स्वास्थ्य सेवा में जैवप्रौद्योगिकी को सस्ता और सुगम बनाना का मिशन  तभी पूर्ण होगा जब टीके उन तक पहुँचेंगें जिन्हें उनकी अत्याधिक जरूरत है। आईआईएल ने टीका उत्पादक बनने के साथ साथ टीका सेवा प्रदाता बनने की जिम्मेदारी भी ले ली है । अभय क्लिनिक्स तथा रक्षा वेटेरनरी केन्द्र आईआईएल की दो ऐसी पहल हैं जो रोगियों और किसानों के घर आंगन तक मात्र टीका नहीं पर टीकाकरण ले जायेंगी।
 
संक्षिप्त में, आईआईएल स्वास्थ्य सेवा में जैवप्रौद्योगिकी को सस्ता और सुगम बनाने के मिशन  में प्रयोगशाला और बाजार दोनों में ठोस रणनीतियां शामिल हैं और इसका निर्माण समर्पित साझेदारी पर हुआ है जो सहक्रियाशील रूप में काम करती हैं।
 
आईआईएल के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए लॉग ऑन करें: www.indimmune.com