दूध अधिप्राप्ति प्रणाली का सुदृढ़ीकरण (एस पी एस)


दूध अधिप्राप्ति प्रणाली का सुदृढ़ीकरण (एस पी एस)

डेरी के क्षेत्र में दुग्ध अधिप्राप्ति प्रणाली, पुराने समय काल में इतनी उत्पादक अनुकूल नही थी ।  दुग्ध का संकलन अधिकतर प्रति लीटर की दर पर किया जाता था, न कि उसकी गुण्वत्ता के आधार पर, जिससे दुग्ध की गुण्वत्ता से कोई खास मायने नही रखता था । यह “दूधिया” प्रणाली की तरह था, जहां ठेकेदार पैसा कमा रहे थे और उत्पादक सदस्य इन ठेकेदारों की भ्रष्ट प्रथा का शिकार हो रहे थे ।

जैसा कि हमने देखा है कि डेरी बोर्ड के द्वारा क्रियान्वित आपरेशन फ्लड कार्यक्रम के फलस्वरूप देश की डेरी सहकारी संस्थाओं ने एक सफल मुकाम की प्राप्ति की । यह भी देखा गया कि उत्पादक को उसके उपज का असली दाम प्रति लीटर के कारण नही मिल रहा था । तदोपरांत सिंगल एक्सिस (सिर्फ फैट), डबल एक्सिस (फैट तथा एस.एन.एफ.), टोटल सालिड्स और एक्युवेलेंट फैट विधि का विकास हुआ ।

डेरी बोर्ड का गठन मजबूत सहकरी संस्थाओं के निर्माण के विचार से किया गया, जिससे ग्रामीण किसानों को दुग्ध सहकारी समितियों में संगठित किया जा सके, जिसके फलस्वरूप ग्रामीण भारत विकास के पथ पर चले ।           
 
दुग्ध अधिप्राप्ति वृद्धि रणनीति

राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड दुग्ध संघों के दुग्ध अधिप्राप्ति को प्रभावित करने वाले मुद्दों को सुलझाने में मदद करता है एवं साथ साथ वह दुग्ध अधिप्राप्ति वृद्धि के लिए रणनीति बनाने हेतु मदद भी करता है:

  • “गहराई और प्रसार की अवधारणा” ; दुग्ध मार्ग का निर्धारण एवं अधिकतम लाभ
  • सदस्यों की निष्ठा सुनिश्चित करने के लिए एक पारदर्शी एवं निष्पक्ष व्यवस्था स्थापित करना
  • सदस्यों में जागरूकता लाना और उसे बढ़ाना
  • दुग्ध संघों को ग्राम स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखने हेतु एम.सी.यू./डी.पी.एम.सी.यू/ई.एम.टी. के उपयोग के लिए सुझाव देना
  • दूध की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने हेतु गांव में बी.एम.सी. यूनिट की स्थापना करना    

राष्ट्रीय डेरी योजना के अंतर्गत वी.बी.एम.पी.एस. का उद्देश्य है:

ग्रामीण स्तर पर एक पुष्ट अधिप्राप्ति प्रणाली को स्थापित करना एवं अधिक से अधिक दूध उत्पादकों को संगठित क्षेत्र के दायरे में लाना ।  
दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु एक निष्पक्ष और पारदर्शी दूध संकलन प्रणाली की स्थापना करते हुए बल्क मिल्क कूलर (बी.एम.सी.), स्‍वचालित दूध संकलन इकाई (ए.एम.सी.यू) और डेटा प्रोसेसर मिल्क कलेक्शन यूनिट (डी.पी.एम.सी.यू) की स्थापना करना
राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड राष्ट्रीय डेरी योजना के अंतर्गत दुग्ध सहकारिता से जुड़े किसानों एवं विभिन्न पदस्‍थ अधिकारियों की क्षमता निर्माण पर भी बल देता है ।