संस्था निर्माण (आई बी)

संस्था निर्माण (आई बी)

राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड के संस्था निर्माण कार्यक्रम का मुख्‍य उद्देश्य ग्राम दुग्ध सहकारी समितियों (डीसीएस) के प्राथमिक सदस्यों, प्रबंध समिति के सदस्यों एवं स्टाफ के साथ-साथ दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के पेशेवरों एवं निर्वाचित बोर्ड के सदस्यों की क्षमताओं को सुव्यवस्थित रूप से मूल्यों के आधार पर सुदृढ़ करना है ।

अवधारणा
वैश्वीकरण और उदारीकरण के इस युग में जब परिचालन सीमाएं कम हुईं हैं तथा सामाजिक- आर्थिक और सांस्कृतिक प्रतिबंधों में शिथिलता आई है, संस्था निर्माण कार्यक्रम सहकारी संस्थाओं को जीवनक्षम, आत्मनिर्भर, गतिशील, विशिष्ट एवं वास्तविक रुप से सदस्यों के स्वामित्व वाली एवं उन्हीं के द्वारा नियंत्रित उद्यम के रुप में स्थापित करता है । यह दृष्टिकोण सहकारिताओं को बेहतर शासन, परिचालन क्षमता में सुधार, प्रबंधन और प्रदर्शन के प्रति पेशेवर दृष्टिकोण के माध्यम से उनके कारोबार को मजबूत करने में मदद करने का प्रयास करता है, साथ ही दीर्घ-काल में स्वनिर्भर चतुर्मुखी प्रगति निर्माण का भी प्रयत्न करता है ।

अभिकल्पना एवं प्रक्रिया
संस्था निर्माण कार्यक्रम का पहला कदम सहकारी संस्थाओं से संबंद्ध सभी साझेदारों को एक साझा दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करने पर केन्द्रित है, विशेष रूप से उत्पादक सदस्य एवं चुने हुए प्रतिनिधि । इस प्रक्रिया का आरंभ बोर्ड अथवा प्रबंध समिति के सदस्यों को संगठनात्मक मूल्य निर्धारित करने और तदनन्तर मिशन को परिभाषित करने के लिए सक्षम बनाने से होता है, मिशन में संस्था के अस्तित्व का उद्देश्य व्यक्त होता है। इसके पश्चात एक रणनीति बनाई जाती है जिसमें दीर्घकालिक उद्देश्य शामिल होते हैं । रणनीतिक योजना को कार्य योजना में विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किया जाता है जिसमें इसके उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए की जाने वाली गतिविधियों का वर्णन होता है । सहकारी संस्थाओं के लिए अभिकल्पना तथा प्रक्रिया एक समान वैचारिकता के आधार पर की गई है, परन्तु क्रियान्वयन की रीति ग्राम दुग्ध सहकारी समितियों और दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों के लिए अलग-अलग है।

डेरी सहकारी समितियां
डेरी सहकारी समिति (डीसीएस) आरम्भिक /ग्रामीण स्तर की सहकारी संस्था है, जहॉं सदस्य अपने अधिशेष दूध की आपूर्ति करते हैं औऱ समिति द्वारा प्रदत्त विभिन्न सेवाओं का प्रयोग करते हैं।

संरचना
डेरी सहकारी समितियॉं स्थानीय व्यापारिक उद्यमों के रुप में कार्य करते हुए अपने सदस्यों की जरूरतों को प्रभावी औऱ किफायती रूप से पूरा करेंगी । डेरी सहकारी समितियों के तीन संघटकों (सदस्य, सचिव और अन्य स्टाफ तथा प्रबंधकारिणि समिति के सदस्य) की जिम्मेदारियों से यह तथ्य स्पष्ट हो होगा ।

  • समिति का व्यवसाय लगातार बढ़ता रहे और सदस्यों की जरूरतें समय पर पूरी हों ।
  • समिति दुग्ध संघ के साथ व्यवसाय की वृद्धि करने के लिए कार्य करती है (समिति संघ को गुणवत्ता युक्त दुग्ध प्रदान करती है और संघ द्वारा प्रदत्त सेवाओं का लाभ लेती है तथा संघ की व्यापारिक गतिविधियों को प्रोन्नत बनाती है और प्रचारित करती है)

सहकारी समिति स्तर पर, समिति के तीनों घटकों – सदस्य, स्टाफ एवं प्रबंधकारिणि समिति के सदस्यों को योग्य तथा इच्छित परिणामों को प्राप्त करने हेतु संबोधन दिया जाता हैं । दुग्ध सहकारी समिति स्तर पर संस्था निर्माण की प्रक्रिया के अंतर्गत वांछित परिवर्तन की प्राप्ति हेतु केन्द्रित प्रयास किए जाते हैं ।

प्रक्रिया
प्रक्रिया के अंतर्गत, दुग्ध सहकारी समिति स्तर पर सरलीकरण के प्रयासों की रूपरेखा बनायी जाती है । इन प्रयासों का मूल उद्देश्य है:

  • दृष्टिकोण अकेले ज्ञान से नहीं बदलता बल्कि अभ्यास एवं अधिक सकारात्मक संदर्भों से बदलता है ।
  • परिवर्तनों को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हम महत्वपूर्ण लोगों की प्रतिभागिता सुनिश्चित  करें ।
  • उर्जा के दोहन के लिए अपेक्षित परिणाम हेतु हमें मजबूत भागीदारी करनी होगी।
  • सामाजिक अपेक्षा प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।


दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ
सहकारी संघ जिला स्तर की संस्था है, जिसका गठन ग्राम स्तर की दुग्ध सहकारी समितियों के द्वारा दूध संकलन, संसाधन और विपणन के लिए तथा इसके सदस्यों के लाभ के लिए सेवाएं प्रदान करने हेतु किया जाता है। संघ से निम्नलिखित अपेक्षाएं की जाती हैं।

संरचना

  • संघ एक जीवंत व्यावसायिक उद्यम के रूप में स्वयं को विकसित करेगी और निजी क्षेत्र के सर्वोत्तम उद्यमों से प्रतिस्पर्धा करते हुए दुग्ध अधिप्रप्ति, प्रसंस्करण, विपणन, उत्पादकता, तथा सदस्यों की संवेदनशीलता में उच्चतर लक्ष्यों की प्राप्ति करेगी ।
  • संघ दीर्घकालीन नीति और व्यापक प्रतिस्पार्धात्मक रणनीति को विकसित तथा क्रियान्वित करेगा । संघ नीतिपरक शासन को अपनाएगा एवं उसका कार्यान्वयन करेगा । संघ के सभी साझेदार दुग्ध उत्पादकों के जीवन में बदलाव लाने हेतु एक साथ मिलकर कार्य करेंगें । संघ में संस्था निर्माण प्रक्रिया के अंतर्गत वांछित परिवर्तन की प्राप्ति हेतु केन्द्रित प्रयास किए जाएंगे ।