सहकारिताओं में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि

सहकारिताओं में महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि

भारत के डेरी उद्योग में महिलाओं के महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। देश के अधिकांश क्षेत्रों में गायों और भैसों के रख-रखाव, उन्हें चारा देने तथा दूध दुहने का महत्वपूर्ण कार्य महिलाएं ही संभालती हैं । डेरी सहकारिता आंदोलन की दीर्घकालिक मजबूती के लिए उनकी भागीदारी में वृद्धि करना अत्यंत आवश्यक है। हालांकि शुरू में एक सदस्य के रूप में उनका कार्य डेरी गतिविधियों पर केंद्रित था, लेकिन आज के दौर की बात करें तो महिलाओं की शासन में अर्थात प्रबंधन समिति और संघ के बोर्डों के माध्यम से उनकी भागीदारी बढ़ानी चाहिए ।

1995 में राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने महिला सशक्तिकरण की प्रायोगिक तौर पर कल्‍पना करते हुए वलसाड, कोल्हापुर, वयनाड तथा पश्चिम भारत में गोवा में महिला डेरी सहकारिता नेतृत्व कार्यक्रम का (डबल्यू.डी.सी.एल.पी.) आरंभ किया। इस कार्यक्रम की सफलता को समग्र देश के अन्य दुग्ध संघों में भी दोहराया गया ।

महिलाओं में नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए बचत एवं उधार समूहों के विकास के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा एवं आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ाने को केन्द्र में रखा गया, जिनसे कि महिलाओं का सशक्तिकरण हुआ ।

आज महिलाएं डेरी में पीछे नहीं हैं, बल्कि वे डेरी विकास के अग्रणी बन गई हैं । महिला सदस्यता के दिलचस्प आंकडे दर्शाते हैं कि कुल महिला दुग्ध उत्पादकों की संख्या 43.80 लाख के करीब है एवं प्रबंधकारिणी  समिति सदस्यों की करीब 3.29 लाख (2013) है । वर्तमान में 1.60 लाख ग्राम दुग्ध सहकारी समितियों में से 26,700 महिला समिति हैं । महिला समिति की वार्षिक वृद्धि दर लगभग 10% है । इन तथ्यों से पता चलता है कि डेरी उद्योग के कारण महिला सशक्तिकरण आज काफी स्पष्ट नजर आता है ।

महिला डेरी सहकारी समितियां
भारत सरकार का मानव संसाधन विकास मंत्रालय दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है जिसके अंतर्गत “प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम सहायता’ (STEP) कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जाता है । इस कार्यक्रम के अंतर्गत, ऐसी दुग्ध सहकारी समितियों का ही गठन किया जाता है, जिनका पूर्ण रुप से महिलाओं द्वारा संचालन किया जाता है ।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने में राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड, “प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम” (STEP) की महत्ता को स्वीकार करता है । दुग्ध संघों को समग्र महिला दुग्ध सहकारी समितियॉं गठित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, चाहे वे प्रशिक्षण एवं नियोजन सहायता कार्यक्रम के लिए पात्र हों या नहीं ।

महिला बचत ग्रुप
राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड द्वारा कुछ दुग्ध संघों में प्रायोगिक तौर पर शुरू किया गया बचत समूहों के गठन को आज भी महिला डेरी सहकारी नेतृत्व कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। बचत समूह सदस्यों की बचत को सीधे या ऋण के रूप में दुधारु पशुओं के रख-रखाव और पशुधन को खरीदने संबंधी तैयारी करता है । यह महिलाओं को दुग्ध सहकारी समितियों में बेचे गए दूध से हुई आय को जमा कराने की एक व्यवस्था उपलब्ध कराता है, महिलाओं की सक्रियता का स्तर बढ़ाता है और उन्हे सामाजिक संपर्क का अवसर देता है ।

बचत समूहों का एक अतिरिक्त लाभ है कि महिलाओं को अपनी स्वयं की संस्थाओं को संचालित करने का अनुभव प्राप्त होता है, यह अनुभव उन्हें डेरी सहकारी समितियों और संघ के संचालन में अधिक जिम्मेदारियाँ निभाने के लिए तैयार करता है ।

  • राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड के दवारा सहकारी समितियों के लिए किए गए अथक प्रयास के चलते महिला सशक्तिकरण और उनकी सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक उत्थान की दिशा में अर्जित उपलब्धियां नीचे संक्षेप में दी गई हैं: ग्रामीण महिलाओं को अब परिवार की आय को जोड़ने, पुरुषों के साथ काम कदम से कदम मिलाकर काम कर रही हैं ।
  • दो दुग्ध संघों, पश्चिम बंगाल में इच्छामती सहकारी दूध संघ और आंध्र प्रदेश में मुलुकन्नुर महिला सहकारी दूध संघ संपूर्ण महिला सहकारी संघ हैं जहां महिलाएं ही पूरी तरह से डेरी उद्यम का संचालन और प्रबंधन करती है ।

महिला डेरी सहकारी नेतृत्व कार्यक्रम
महिला डेरी सहकारी नेतृत्व कार्यक्रम 1995 में एक प्रायोगिक कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य सहकारी समितियों, संघो और महासंघों के शासन में महिलाओं की सक्रिय सदस्यता एवं नेता के रूप में सहभागिता से उल्लेखनीय वृद्धि कर डेरी सहकारी आंदोलन को सुदृढ़ करना था । राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड ने दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों को उनके द्वारा महिला डेरी सहकारी नेतृत्व विकास कार्यक्रमों के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न गतिविधियों में सहायता प्रदान की । आज भी कुछ दुग्ध संघ इस संकल्पना को आगे बढ़ा रहे हैँ ।

महिला डेरी सहकारिता नेतृत्व कार्य़क्रम के अंतर्गत उन महिला कर्मचारियों की प्रशिक्षण हेतु पहचान की जाती है जिनमें नेतृत्व करने की क्षमता छिपी है। है। गांव के स्तर पर मुख्य रणनीति थी स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षित कर उन्हें जानकार व्यक्ति के रूप में स्थापित करना जिससे डेरी सहकारिताओं में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा सके और सहायता प्रदान की जा सके ।

राष्ट्रीय डेरी योजना-1 के अंतर्गत महिलाओं पर केंद्र बिंदु
राष्ट्रीय डेरी योजना-1 ग्रामीण स्तर पर अधिक से अधिक उत्पादक सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने एवं इसके साथ-साथ उनको शासन संबंधित उद्देश्यों पर केंद्रित है । सभी स्वीकृत उप-परियोजनाओं में महिलाओं उत्पादक सदस्यों का न्यूनतम लक्ष्य 30% रखा गया है ।

उप-योजना में प्रत्येक अंतिम कार्यान्‍वयन एजेंसी (ई.आई.ए.) के लिए महिला विस्तार अधिकारी का प्रावधान रखा गया है, जो महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगी, संस्था के मूल्यों का संदेश देगी एवं महिलाओं में स्वछ दुग्ध उत्पादन के उपर संदेश देगी ।

राष्ट्रीय डेरी योजना-1 के अंतर्गत महिला संस्थाओं के क्षमता निर्माण कार्यक्रम के लिए सहायता की जाती है, जिससे दुग्ध संकलन को संचालित करने में उन्हें मदद मिलती है ।