पितृत्‍व सत्‍यापन परीक्षण

पितृत्‍व सत्‍यापन परीक्षण

प्रजनन कार्यक्रम को कुशलतापूर्व चलाने के लिए यह अति आवश्‍यक है कि पशुओं की सही वंशावली की जानकारी हो एवं सुनिश्चित पशुओं के बीच सही संबंध स्‍थापित हो । दुधारू पशुओं के आनुवंशिक सुधार के लिए संतान परीक्षण कार्यक्रम एक महत्‍वपूर्ण कारक है । सही पितृत्‍व सत्‍यापन दर्ज करने में विफलता से आनुवंशिक और प्रजनन मूल्‍यों के अनुमान में त्रृटियां उत्‍पन्‍न हो सकती हैं और इस कारण से नर पशुओं के मूल्‍यांकन में पक्षपात हो सकता है ।

पितृत्‍व परीक्षण में प्रयुक्‍त माइक्रोसेटेलाइट मार्करों के आकार में विभिन्‍नता हो सकती है तथा इस प्रकार की परिवर्तनीयता ही उन्‍हें पितृत्‍व विश्‍लेषण के लिए उपयोगी बनाती है । सभी पशुओं के प्रत्‍येक जीन की दो कॉपियां होती है । पितृत्‍व परीक्षण इस सिद्धांत पर निर्भर करता है जिसमें कोई पशु के जीन एक कॉपी अपनी मां से तथा एक अपने पिता से आनुवंशिक रूप से प्राप्‍त करता है । इसलिए यदि कोई विशेष मार्कर (जिसे एलील कहा जाता है) कहा जाता है जो बछड़े में मौजूद है, लेकिन दोनों नामजद माता-पिता दोनों में अनुपस्थित हो तो माता-पिता को बछड़े की वंशावली से बाहर रखा जाता है ।  पितृत्‍व सत्‍यापन संबंध का बहिष्‍कार तब किया जाता है जब ख्‍यात संबंध के लिए किसी पशु के जीनोटाइप में असंगति पाई जाती है ।

इस प्रक्रिया में नर, मादा तथा बछड़े का डीएनए एक्‍सट्रेक्‍शन - माइक्रो सेटेलाइट मार्कर्स का मल्‍टीप्‍लेक्‍स पीसीआर एंप्लिफिकेशन-कैपिलरी इलेक्‍ट्रोफोरेसिस – संबंध स्‍थापित करने के लिए बछड़े के डीएनए के साथ नर तथा मादा डीएनए की तुलना करना शामिल है ।

उपर्युक्‍त आंकड़े यह दर्शाते हैं कि माइक्रोसेटेलाइट मार्कर कंप्‍यूटर पर डिजिटल इमेज में परिवर्तित होने के बाद कैसा दिखाई पड़ता है । प्रत्‍येक शीर्ष से नीचे की संख्‍या, मार्कर के आकार को बताती है और यही अंक पशु की डीएनए टाइपिंग रिपोर्ट में प्रदर्शित होती है । इस सामान्‍य वर्णन से यह देखा जा सकता है कि बछड़े में परिवर्तित नर ने अपने दो एलीन (चिहि्न हरा) प्रत्‍येक नर तथा मादा से वंशानुगत अनुवांशिक रूप से प्राप्‍त किया है ।