आनुवंशिक रोग परीक्षण

आनुवंशिक रोग परीक्षण

पशु प्रजनन में, आनुवंशिक विकार प्रजनकों के लिए सबसे महत्‍वपूर्ण मुद्दों में से एक है । ये मोनोजेनिक रिसेसिव ऑटोसोमल विकार है जिसके कारण शीघ्र मृत्‍यु, गर्भपात या ब्‍याने के बाद आरंभिक अवस्‍था में मृत्‍यु होती है । कृत्रिम गर्भाधान (एआई) का व्‍यापक प्रयोग तथा वीर्य का अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार तथा प्रजनक नरों के प्रयोग से पशु आबादी में अवांछित जीन का तेजी से प्रसार बढ़ा है । कृत्रिम गर्भाधान के लिए प्रयुक्‍त नरों के नियमित परीक्षण से पशुओं की आबादी में हानिकारक जीन प्रसार के खतरे में कमी आती है । चार प्रमुख आनुवंशिक विकारों जैसे बोवाइन ल्‍यूकोसाइट एडहीशन डिफिसियेंसी (ब्‍लैड), सिट्रूलिनिमिया, डिफिसियेंसी ऑफ यूरीडाइनमोनोफास्‍फेट सिंथेस (डम्‍पस) तथा फैक्‍टर XI डिफिसियेंसी सिड्रोम की जांच प्रयोगशाला में की जाती है ।

I. बोवाइन ल्‍यूकोसाइट एडहीशन डिफिसियेंसी (ब्‍लैड)

ब्‍लैड एक रोग है जिसके लक्षण स्‍वरूप न्‍यूट्रोफिल पर चिपकाव अणु (एडहीसिव मोलिक्‍यूल) की एक्‍सप्रेशन में कमी होती है जिसे बीटा इंटेगिंस कहा जाता है । ये प्रोटीन न्‍यूट्रोफिल को चोट के स्‍थान पर जाने में मदद करता है । ब्‍लैड से प्रभावित पशुओं में बार-बार संक्रमण होने से  न्‍यूमोनिया अल्‍सरेटिव एंड ग्रनुलोमेटस स्‍टोमेटिटिस बहुत बढ़ी संख्‍या में बैक्‍टीरिया संख्‍या पिरियो‍डोटिटिस, दांत की हानि देरी से घाव का भरा जाना बार-बार न्‍यूट्रोफिलिया तथा अल्‍प अवस्‍था में पशु की मृत्‍यु के लक्षण पाए जाते हैं ।

BLAD RFLP

 जांच विधि: रक्‍त से डीएनए को पृथक करना – जीन को परिवर्धित करना – पीसीआर उत्‍पाद (रेल्‍फ) का इंजाइम पाचन में रोक लगाना – जेल इलेक्‍ट्रोफेरेसिस – व्‍याख्‍या

II. सिट्रलिनिमिया

बोवाइन सिट्रलिनिमिया यूरिया चक्र का एक अप्रभावी अलिंग सूत्री वंशानुगत विकार है जो कि प्रसव के तुरंत बाद की अवधि में घातक होता है । इसके परिणामस्‍वरूप आर्जिनिनोएक्‍सीनेट सिंथेस(एएसएस) की कमी होती है जो कि यूरिया चक्र के इंजाइमों में से एक है । बोवाइन सिट्रलिनेमिया से प्रभावित बछड़े जन्‍म के तुरंत बाद सामान्‍य प्रतीत होते हैं, लेकिन तीसरे तथा पांचवें दिन के बाद से रोग तेजी से बढ़ता है । इन नैदानिक संकेतों के शुरू होने के 12 घंटों  में प्राय: पशु की मृत्‍यु हो जाती है । प्रभावित बछड़े के मस्तिष्‍क में अमोनिया का जमा होना सिट्रूलिनिमिया के नैदानिक संकेत के परिणाम के रूप में देखा जाता है ।

 

Citrullinaemia RFLP

 

जांच विधि: रक्‍त के डीएनए को पृथक करना – जीन का पीसीआर – पीसाआर का एंजाइम से पाचन में रोग -  जेल इलेक्‍ट्रोफोरेसिस – व्‍याख्‍या

 III. युरिडाइन मोनोफास्‍फेट सिंथेज की कमी (डम्‍पस)

डम्‍पस एक घातक वंशानुगत ऑटोसोमल विकार है जिससे गर्भाशय में आरोपण के दौरान जल्‍दी भ्रूण मृत्‍यु हो जाती है । स्‍तनधारी कोशिकाओं में पायरीमिडिनन्‍यूक्लियोटाइड संश्‍लेषण के अंतिम चरण में आरोटेट का रूपांतरण यूएमपीएस में होता है जिसके लिए यूएमपीएस एंजाइम जरूरी होता है । यूएमपीएस जीन में परिवर्तन के कारण स्‍टोप कोडोन पहले ही आ जाता है जिसकी वजह से यूएमपीएस एंजाइम निष्क्रिय हो जाता है फलस्‍वरूप गर्भधारण से लगभग 40 दिनों के बाद गर्भपात हो जाता है और यह प्रजनन समस्‍या का मुख्‍य कारण है ।

DUMP RFLP

परीक्षण विधि: खून से डीएनए निष्‍कर्षण – जीन का प्रवर्धन (पीसीआर) – पीसीआर उत्‍पादन का एंजाइम पाचन – जेल इलेक्‍ट्रोफोरसिस – व्‍याख्‍या

IV. फैक्‍टर XI डिफिसियेंसी सिंड्रोम

रक्‍त जमाव में एक दर्जन से अधिक प्रोटीन शामिल हैं जिनमें से एक फैक्‍टर XI भी है । फैक्‍टर  XI डिफिसियेंसी सिंड्रोम, फैक्‍टर  XI जीन के 12वें  एक्‍सऑन के भीतर 76 बेस पेयर सेग्‍मेंट के अन्‍तर्वेश के कारण होता है । दूसरी ओर, इस उत्‍परिवर्तन के कारण हेट्रोजाइगस तथा होमोजाइगस दोनों पशुओं में कुछ रोगों जैसे – थनैला, मेट्रीटिस तथा निमोनिया होने की संभावना होती है और कुछ पशुओं का ब्‍यांत के साथ-साथ उत्‍तरजीविता दर में कमी होती है ।

फैक्‍टर XI पीसीआर

 जांच की विधि: रक्‍त से डीएनए को पृथक करना – जीन का पीसीआर – जेल इलेक्‍ट्रोफोरेसिस – व्‍याख्‍या