GIS for Milk Unions

दूध संघों के लिए जीआईएस

 

दूध संघों के लिए जीआईएस क्‍या है ? 

सहकारी दूध संघों से प्राप्‍त किए गए दूध की गुणवत्‍ता इसके सभी गतिविधियों की योजना बनाने में सबसे महत्‍वपूर्ण है । दूध प्राप्ति गतिविधियां विस्तृत भौगोलिक क्षेत्रों में फैली हुई है तथा इसमें बहुत बड़ी संख्‍या में स्‍वतंत्र डेरी सहकारी समितियां (डीसीएस) तथा इन समितियों के हजारों किसान शामिल हैं । दूध समितियां इससे जुड़ी समितियों को भुगतान करने वाले मूल्‍य तथा उनको प्रदान किए जाने वाले प्रमुख तकनीकी इनपुटों अर्थात पशु चारा आपूर्ति, कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं तथा पशुचिकित्‍सा सेवाओं के द्वारा प्राप्ति के स्‍तरों को प्रभावित करती हैं ।

भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) एक सूचना प्रौद्योगिकी कार्यक्रम है, जिसमें इन उपर्युक्‍त गतिविधियों की निगरानी, समस्‍याग्रस्‍त क्षेत्रों तथा आवश्‍यक हस्‍तक्षेपों को निर्धारित करने के लिए एक मजबूत दृश्‍यात्‍मक प्रभाववाला जीआईएस उपकरणों का एक सेट (समुच्‍चय) है ताकि आगे की समस्‍याओं से छुटकारा पाया जा सके तथा व्‍यवसाय की योजना बनाई जा सके । दूध संघो के लिए जीआईएस की परिकल्पना, डिजाइन और विकास विशेष रूप से देश के सहकारी दूध संघों के प्रयोग के लिए किया गया है ।

आपको जीआईएस की आवश्‍यकता क्‍यों है ?

  • क्‍या आप विभिन्‍न स्‍थानों वाले विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र में परिचालन करते हैं
  • क्‍या आपको विश्‍लेषण क्षमताओं से युक्‍त सूचना तंत्र की आवश्‍यकता है जो कि  अन्‍य से संबंधित प्रत्‍येक प्रचालन संबंधी भौगोलिक स्‍थलों को भी दर्शाता है
  • क्‍या आप नियमित आंकड़ों, जिन्‍हें आपने इन फील्‍ड स्‍थलों से संकलित कर रहे हैं, से आधारभूत प्रवृत्ति/पैटर्न तथा निष्‍पादन का पता लगाना चाहते हैं ?
  • क्‍या आप अन्‍य स्‍थान या किसी अन्‍य समय पर घटनाओं की संभव भविष्‍यवाणी कर सकते हैं ?
  • यदि इन प्रश्‍नों के उत्‍तर स्‍वीकारात्‍मक हों आपके लिए इस जीआईएस के लाभों को जानना उपयोगी हो सकता है ।

जीआईएस के प्रयोग के लिए कंप्‍यूटर/सिस्‍टम की क्‍या आवश्‍यकता है ?

सॉफ्टवेयर: इंटरनेट पर नि:शुल्‍क डाउनलोड करने के लिए कई ओपन सोर्स जीआईएस सॉफ्टवेयर उपलब्‍ध हैं । उनमें से एक क्‍यूजीआईएस है हम जीआईएस सें संबंधित विश्‍लेषण के लिए इसका प्रयोग करने की संस्‍तुति करते हैं तथा इसे इंटरनेट (www.ggis.org) से डाउनलोड किया जा सकता है ।

हार्डवेयर: दूध संघ स्‍तर पर जीआईएस के लिए न्‍यूनतम 2 जीबी रैम तथा 50 जीबी हार्डडिस्‍क स्‍पेस की आवश्‍यकता होती है जिससे कि अपेक्षित जीआईएस डाटाबेस, मास्‍टर फाइल तथा दूध संघ के एमआईएस ट्रांजेक्‍शन फाइलों के अभिलेखों को जगह दी जा सके । आगे, ऑनलाइन डाटाबेस की पहुंच के लिए कम से कम 512 केबीपीएस इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए ब्राडबैंड कनेक्‍शन की आवश्‍यकता है ।

इसका कितना मूल्‍य है ? क्‍या दूध संघ द्वारा वहन करने योग्‍य कोई आवर्ती मूल्‍य/रख-रखाव प्रभार है ?

एनडीडीबी के साथ एमओयू पर हस्‍ताक्षर होने के बाद दूध संघों के प्रचालन क्षेत्रों के लिए जीआईएस डाटाबेस नि:शुल्‍क प्रदान किए जाएंगे । इस डाटाबेस में भारतीय जनगणना, 2011 द्वारा उपलब्‍ध आंकड़ों के अनुसार जिला/तालुका/ग्राम सीमाएं, शहरी रास्‍तों प्रमुख सड़कों, नदियों, रेलवे लाइन/स्‍टेशनों को मानचित्र से जोड़ा गया है । इस डाटाबेस के लिए दूध संघ द्वारा कोई आवर्ती शुल्‍क/रख-रखाव प्रभार नहीं लिया जाएगा ।

दूध संघ के किन कार्य समूह को जीआईएस का प्रयोग करने पर सबसे अधिक लाभ मिलने की संभावना है ?

ऐसे कार्य समूह जैसे दूध प्राप्ति तथा विपणन प्रचालन, जो क्षेत्र आधारित है, उन्‍हें इस जीआईएस डाटाबेस का प्रयोग करने पर सर्वाधिक लाभ प्राप्‍त होने की संभावना है ।

 

प्रस्‍तावित जीआईएस एप्लिकेशन के मुख्‍य केंद्र बिंदु कौन से हैं ?

।.   ग्राम डेरी सहकारी समितियों (डीसीएस) से दूध संकलन का प्रबंधन अधिकांश दूध संघों में डीटीएस को भुगतान हेतु दूध प्राप्ति आंकड़ों को व्‍यवस्थित करने के लिए कंप्‍यूटरीकृत दूध बिलिंग प्रणाली मौजूद है । इन आंकड़ों का प्रयोग समस्‍याग्रस्‍त समितियों की शीघ्र पहचान या हस्‍तक्षेपों को निर्धारित करने या व्‍यावसायिक रणनीतियां बनाने के लिए किया जा सकता है । इस प्रस्‍तावित जीआईएस एप्लिकेशन में इन आंकड़ों को दूध संघ मानचित्र से जोड़ा जा सकता है जो भौगोलिक तौर पर गांवों को दर्शाता है ।

इसके बाद संकलन संबंधी गतिविधियों की योजना बनाई जा सकती है तथा आसानी से निगरानी की जा सकती है । उदाहरण के लिए, इससे ऐसे मार्गवार या क्षेत्रवार डीसीएस की पहचान करना संभव होगा जो अपेक्षाकृत कम गुणवत्‍ता वाले या फैट एवं एसएनएफ% से संबंधित खराब गुणवत्‍ता वाले दूध की आपूर्ति कर रहे हैं तथा प्रति लीटर दूध आपूर्ति इत्‍यादि के लिए अपेक्षित पशु आहार की तुलना में कम आहार खरीद रहे हैं ।

इसमें संकलित सूचनाओं को मासिक डाटाबेस फाइलों में संग्रहीत करने की आवश्‍यकता है । जहां भी कंप्‍यूटरीकृत दूध बिलिंग प्रणाली चालू है वहां पर सामान्‍य 3 दूध बिलिंग साइकिलों को एक माह में एक फाइल के रूप में संकलित करके इसे आसानी से किया जा सकता है ।

डीसीएस से चिलिंग केंद्र/डेरी संयंत्र तक दूध के परिवहन/फ्लीट ऑपरेशन (बेड़ा परिचालन) का प्रबंधन

इसकी वर्तमान बाधाओं के दिए गए सेट के अंतर्गत दूध संघ के प्राप्ति मार्ग की योजना     आम तौर पर दोहरे उद्देश्‍य से बनाई जाती है जिससे कि प्रतिकिग्रा दूध संकलन की मात्रा को अधिकतम बढ़ाया जाए तथा साथ ही साथ प्रतिलीटर दूध संलकन के मूल्‍य को न्‍यूनतम किया जाए । इसके अतिरिकित, मौसमी या आर्थिक बाधाओं के कारण इन दूध मार्गों में विविधता आ सकती है। प्रस्‍तावित जीआईएस एप्लिकेशन में डिजिटलीकृत मैप पर इन दूध मार्गों के बारे में बताना संभव होगा तथा मैन्‍युअल प्रक्रियाओं की तुलना में वैकल्पिक दूध मार्गों का पता लगाने की प्रक्रिया संभव हो पाएगी ।

दूध संघ डीसीएस तथा चिलिंग केंद्र/डेरी संयंत्र के मध्‍य वर्तमान दूध मार्गों पर आधारित दूध मार्ग का मैप (मानचित्र) निर्मित करने के लिए उपलब्‍ध जानकारी का प्रयोग कर सकते हैं जिसे धरातल पर आवश्‍यक बदलावों के अनुरूप बदला जा सकता है ।

।।।. डीसीएस के साथ जीवंत संपर्क एवं इंटरफेस (अंतरापृष्‍ठ)

सामाजिक गतिविधियों पर आंकड़े जैसे संख्‍या तथा जाति के अनुसार सदस्‍यता वितरण, भूमिजोत पैटर्न, लिंग इत्‍यादि, उत्‍पादक सदस्‍यों/गौ उत्‍पादक सदस्‍यों से संकलित दूध की गुणवत्‍ता, स्‍थानीय रूप से बेचा गया दूध, संघ को भेजा गया दूध, समिति द्वारा संचालित व्‍यवसाय जैसे घी की बिक्री, चारा बिक्री इत्‍यादि, वित्‍तीय विवरण; निवेश तथा व्‍यय/आय, सुविधाएं तथा डीसीएस पर उपलब्‍ध सुविधाएं, बोर्ड सदस्‍यों/कर्मचारियों का विवरण इत्‍यादि वर्ष में एक बार अर्थात 31 मार्च को वित्‍तीय वर्ष की समाप्ति पर संकलित किया जाए । प्रस्‍तावित जीआईएस एप्लिकेशन में, इन आंकाड़ों को मिल्‍कशेड मैप पर संलग्‍न किया जा सकता है तथा दृश्‍य रूप में उसका विश्‍लेषण किया जा सकता है । समितियों के विभिन्‍न प्रभावकारी वस्‍तुओं जैसे –विभिन्‍न लेखा वर्ग की समितियां, मार्ग, महिला सदस्‍यता %, भूमिहीन सदस्‍यता का %, डीसीएस स्‍तर पर संकलित दूध की मात्रा, डीसीएस स्‍तर पर प्राप्‍त प्रतिलीटर दूध के लिए किया गया व्‍यय, विभिन्‍न उपलब्‍ध सुविधाएं इत्‍यादि को वर्गीकृत करना संभव हो पाएगा ।

इन एकत्रित सूचनाओं को वार्षिक डाटाबेस फाइल में परिवर्तित करने की आवश्‍यकता है । इसे डीसीएस के सांविधिक वार्षिक वित्‍तीय विवरणों (तुलनपत्र/पीएंडएल विवरण) से प्राप्‍त अधिकांश जानकारियों को संकलित करके आसानी से किया जा सकता है । इन दूध संघों के लिए भी यह आसान होगा जिनके पास मासिक डीसीएस एमआईएस रिपोर्टिंग प्रणाली है जिससे कि वार्षिक तौर पर आंकड़ा संकलित करके जीआईएस एप्लिकेशन में डाटाबेस उपलब्‍ध कराया जा सकता है। अन्‍य दूध संघों में जिनके पास ये प्रणालियां उपलब्‍ध नहीं हैं, वे उपर्युक्‍त अनुसार प्राप्ति तथा संकलन गतिविधियों की शुरूआत करने की इच्‍छा कर सकते हैं ।

IV. डीसीएस सदस्‍यों के पशुओं के लिए पशु चिकित्‍सा सुविधाओं की व्‍यवस्‍था/ प्रबंधन

रोग रिकार्डिंग प्रणाली के विकास का मुख्‍य उद्देश्‍य दूध संघों के प्रचालन क्षेत्र में रोग की स्थिति  संबंधी जानकारी का पता चलना है ताकि अधिक प्रभावी पशुचिकित्‍सा सेवाएं की व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध करायी जा सके । इस प्रकार संकलित रोग आंकड़ों का प्रसार क्षेत्र की परिमाण तथा समय पर महामारी विज्ञान संबंधी सूचना का आवधिक विश्‍लेषण एवं मूल्‍यांकन किया जा सकता है । आगे जाति, नस्‍ल, आयु, लिंग शरीर क्रिया वैज्ञानिक स्थिति के संदर्भ में पशुओं की अरक्षितता का विश्‍लेषण किया जा सकता है । जीआईएस एप्लिके शनका प्रयोग रोगों के प्रबंधन एवं नियंत्रण हेतु आंकड़ों के विश्‍लेषण के साथ-साथ आवश्‍यक हस्‍तक्षेप निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है ।            

पशुचिकित्‍सक उनके द्वारा किए सभी उपचारों को मामलों के आधार पर रिकार्ड कर सकते हैं । यह इन दूध संघों के लिए भी आसान होगा जिनके पास इन पशुचिकित्‍सकीय मामलों में मासिक एमआईएस रिपोर्टिंग प्रणाली है जिससे कि मासिक आंकड़ा संकलित करके जीआईएस एप्लिकेशन को डाटाबेस उपलब्‍ध कराया जा सके । अन्‍य दूध संघ जिनके पास ये प्रणालियां उपलब्‍ध नहीं है, वे उपर्युक्‍त प्राप्ति एवं संकलन गतिविधियों की शुरूआत कर सकते हैं ।

V. डीसीएस सदस्‍यों के लिए कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं (एआई) की व्‍यवस्‍था/प्रबंधन

निष्‍पादित एआई की विधिवत रिकार्डिंग तथा इसका नियमित विश्‍लेषण किसी प्रभावी एआई सेवाओं की योजना बनाने तथा निगरानी के लिए मुख्‍य बिन्‍दु है।  भले ही वह दूध संघ के द्वारा या सरकारी/गैर सरकारी संस्‍थाओं के माध्‍यम से सीधे डीसीएस सदस्‍यों को उपलब्‍ध कराई गई हो । इस उद्देश्‍य से आंकड़ा संकलन की वर्तमान प्रणालियों का अध्‍ययन करने,  उसे मानकीकृत करने तथा अधिक प्रभावकारी बनाने की आवश्‍यकता है, यदि यह पहले न किया गया हो । पशु तथा पशु स्‍वामित्‍व पहचान के साथ-साथ निष्‍पादित एआई, गर्भाधान निदान तथा उक्‍त से संबंधित ब्‍यांत पर ऐतिहासिक आंकड़ों की उचित रिकार्डिंग के लिए विशेष ध्‍यान दिया जाए ।

एकल/क्‍लस्‍टर एआई केंद्रों/मोबाइल एआई सुविधाओं के लिए ‘एआई कार्ड’ का प्रयोग किया जा सकता है, जिसमें पशु प्रति पशु आधार पर एआई निष्‍पादन को रिकार्ड करने के लिए एक समान डाटा प्रविष्टि प्रपत्र है । इसके अतिरिक्‍त, इन एआई केंद्रों/सुविधाओं पर एक रजिस्‍टर तैयार किया जा सकता है  ताकि इसमें एआई, गर्भाधान निदान तथा जन्‍मे बछड़े से संबंधित पशुओं का इतिहास मासिक तौर पर रिकार्ड किया जा सके । विभिन्‍न केंद्रों/मोबाइल सुविधाओं पर इन मासिक रिकार्डिंग के आधार पर दूध संघों के सभी आंकड़ों को संकलित किया जा सकता है तथा जीआईएस प्रणाली के प्रयोग के लिए डाटाबेस विकसित किया जा सकता है ।

VI. मिल्‍क शेड में दूध उत्‍पादन संभावना का आंकलन

इनके मिल्‍क शेडों के विभिन्‍न भागों में दूध उत्‍पादन संभावना का आंकलन करना दूध संघ के संपूर्ण गतिविधियों की योजना बनाने के लिए महत्‍वपूर्ण कारक हैं । यदि किसी गांव की पारिश्रमिक रिपोर्ट उपलब्‍ध है तो सॉफ्टवेयर द्वारा इस फाइल/तालिका का प्रयोग ग्रामवार दूध उत्‍पादन संभावना को तलाशने में किया जा सकता है ।

 

यदि आप अपने दूध संघ में जीआईएस को कार्यान्वित करना चाहते हैं, तो क्‍या करना चाहिए?

इस संबंध में दूध संघ ग्रुप प्रमुख, क्षेत्रीय विश्‍लेषण तथा अध्‍ययन एनडीडीबी, आणंद को एक अनुरोध पत्र भेज सकता है ।

 

क्‍यूजीआईएस एप्लिकेशन तथा जीआईएस डाटाबेस के प्रयोग के लिए कुछ व्याख्यात्मक उदाहरण: